उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye aur baat ki rang-e-bahaar kam hoga

ये और बात कि रंग-ए-बहार कम होगा

یہ اور بات کہ رنگ بہار کم ہوگا

शायर: Aanis Moin5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये और बात कि रंग-ए-बहार कम होगा
नई रुतों में दरख़्तों का बार कम होगा

तअ'ल्लुक़ात में आई है बस ये तब्दीली
मिलेंगे अब भी मगर इंतिज़ार कम होगा

मैं सोचता रहा कल रात बैठ कर तन्हा
कि इस हुजूम में मेरा शुमार कम होगा

पलट तो आएगा शायद कभी यही मौसम
तिरे बग़ैर मगर ख़ुश-गवार कम होगा

बहुत तवील है 'आनस' ये ज़िंदगी का सफ़र
बस एक शख़्स पे दार-ओ-मदार कम होगा