उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wo mera maujon se laD laD kar ubhar kar dekhna

वो मिरा मौजों से लड़ लड़ कर उभर कर देखना

وہ مرا موجوں سے لڑ لڑ کر ابھر کر دیکھنا

शायर: Parveen Sultana Saba8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वो मिरा मौजों से लड़ लड़ कर उभर कर देखना
दोस्तों का दूर साहिल से समुंदर देखना

हम कई सदियाँ तुम्हारे नाम पर लिख जाएँगे
तुम भी इक लम्हा हमारे नाम लिख कर देखना

हो सदफ़ की चाह तो तह में उतरना शर्त है
क्या किनारों पर खड़े यूँ रेत पत्थर देखना

मर-मिटे हो जिस के तुम चश्म-ओ-लब-ओ-रुख़सार पर
उस बुत-ए-काफ़िर के बातिन का भी मंज़र देखना

कैसा तूफ़ान-ए-हवादिस क्या तलातुम क्या भँवर
देख लो उन सब को तुम फिर मेरे तेवर देखना

सर निगूँ साहिल से टकरा कर पलटती मौज के
वलवले चाहो तो फिर तूफ़ाँ में रह कर देखना

गर्दिश-ए-सय्यारगाँ क़िस्मत बताती है अगर
काम फिर किस का है तारों का मुक़द्दर देखना

है 'सबा' हर रात की तक़दीर में नूर-ए-सहर
रौशनी देखेगा अपना भी मुक़द्दर देखना