उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wo mere haal pe roya bhi muskuraya bhi

वो मेरे हाल पे रोया भी मुस्कुराया भी

وہ میرے حال پہ رویا بھی مسکرایا بھی

शायर: Aanis Moin5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वो मेरे हाल पे रोया भी मुस्कुराया भी
अजीब शख़्स है अपना भी है पराया भी

ये इंतिज़ार सहर का था या तुम्हारा था
दिया जलाया भी मैं ने दिया बुझाया भी

मैं चाहता हूँ ठहर जाए चश्म-ए-दरिया में
लरज़ता अक्स तुम्हारा भी मेरा साया भी

बहुत महीन था पर्दा लरज़ती आँखों का
मुझे दिखाया भी तू ने मुझे छुपाया भी

बयाज़ भर भी गई और फिर भी सादा है
तुम्हारे नाम को लिक्खा भी और मिटाया भी