उर्दू शायरी · ग़ज़ल

waqt ki dahliz par baiThe hain jaane ke liye

वक़्त की दहलीज़ पर बैठे हैं जाने के लिए

وقت کی دہلیز پر بیٹھے ہیں جانے کے لئے

शायर: K K Nanda Ashk6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वक़्त की दहलीज़ पर बैठे हैं जाने के लिए
मुंतज़िर हैं मौत के आराम पाने के लिए

क्या लिखूँ जो ज़िंदगी अपनी कहानी कह गई
लफ़्ज़ लाऊँ मैं कहाँ से इस फ़साने के लिए

जो बनाया था कभी वो घर बिखर कर रह गया
हम तरसते ही रहे उस आशियाने के लिए

महफ़िल-ए-जाम-ओ-सुबू में अब कहाँ वो रौनक़ें
अब कहाँ अंदाज़-ए-साक़ी है दिखाने के लिए

ज़ेब देता ही नहीं हर बात पर यूँ रूठना
क्या करें जाएँगे फिर उन को मनाने के लिए

ज़िंदगी की उलझनों में हर कोई मसरूफ़ है
'अश्क' किस के पास बैठें दिल लगाने के लिए