उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jab ruTh jaana aap ka achchha nahin laga

जब रूठ जाना आप का अच्छा नहीं लगा

جب روٹھ جانا آپ کا اچھا نہیں لگا

शायर: K K Nanda Ashk6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जब रूठ जाना आप का अच्छा नहीं लगा
क्यों मान जाना आप का अच्छा नहीं लगा

मिट्टी में क्यों मिलाते हैं इन मोतियों को आप
आँसू बहाना आप का अच्छा नहीं लगा

महफ़िल से जो निकाला कोई बात ही न थी
हाँ मुस्कुराना आप का अच्छा नहीं लगा

हर आस्ताँ पे देखिए ताज़ीम के लिए
सर को झुकाना आप का अच्छा नहीं लगा

इज़्ज़त नहीं बड़ों की न छोटों से प्यार है
हम को ज़माना आप का अच्छा नहीं लगा

गो 'अश्क' ग़ैर ही सही लेकिन यूँ बज़्म से
उस को उठाना आप का अच्छा नहीं लगा