उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wahi zid un ko hai wahi hai haT

वही ज़िद उन को है वही है हट

وہی ضد ان کو ہے وہی ہے ہٹ

शायर: Pandit Jawahar Nath Saqi11 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वही ज़िद उन को है वही है हट
उन की चाही नहीं है ये झंझट

पाँव की मेरे जो सुनी आहट
हुए दाख़िल मकान में झट-पट

शोख़ कितना किया है पीर-ए-मुग़ाँ
मुग़बचे हो गए बड़ मुँह-फट

कोई पहलू नज़र नहीं आता
देखिए बैठे ऊँट किस करवट

याद करते नहीं कभी वो हमें
नाम की उन के हाँ लगी है रट

ज़ेब-ए-महफ़िल है माह-रुख़ मेरा
हर तरफ़ है सितारों का झुरमुट

जल्वा-गह में 'अजब करिश्मा है
याद करते ही आ गए झट-पट

जल्वा-फ़रमा वो गुल है गुलशन में
हर रविश पर लगे हुए हैं ठट

इन को पर्दे में भी हिजाब रहा
है नुमायाँ नक़ाब में घूँघट

नाला-ए-दिल चराग़-ए-रौशन है
कोह-ए-आतिश-फ़शाँ की है ये लिपट

बादा-ए-नाब क़िस्मत-ए-अग़्यार
'साक़ी'-ए-ज़ार को मिले तलछट