उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dagh-e-gham-e-firaq miTaya na jaega

दाग़-ए-ग़म-ए-फ़िराक़ मिटाया न जाएगा

داغ غم فراق مٹایا نہ جائے گا

शायर: Pandit Jawahar Nath Saqi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दाग़-ए-ग़म-ए-फ़िराक़ मिटाया न जाएगा
जलता हुआ चराग़ बुझाया न जाएगा

इंसाफ़ अपना दावर-ए-महशर से हो तो हो
क़ज़िया किसी से दिल का चुकाया न जाएगा

रोको न चश्म-ए-शोख़ को मेरी तरफ़ से तुम
आँखें हैं दिल नहीं कि मिलाया न जाएगा

है दिल में उन के ग़ैर की सूरत बसी हुई
दिल में भी अब तो उन को बिठाया न जाएगा

है तेरी याद दिल में मरे नक़्श-कल-हजर
दिल से तिरा ख़याल मिटाया न जाएगा

'साक़ी' है तुम को मिलने की जिस गुल की आरज़ू
उस से सर-ए-मज़ार भी आया न जाएगा