उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wah kya hum ko banaya aur bana kar rah gae

वाह क्या हम को बनाया और बना कर रह गए

واہ کیا ہم کو بنایا اور بنا کر رہ گئے

शायर: Pandit Jawahar Nath Saqi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वाह क्या हम को बनाया और बना कर रह गए
वस्ल का मुज़्दा सुनाया और सुना कर रह गए

ले गया शौक़ उस के दर तक फिर कमी हिम्मत ने की
हल्क़ा-ए-दर को हिलाया और हिला कर रह गए

मैं ने जो अपने दिल-ए-गुम-गश्ता की पूछी ख़बर
सर हिलाया मुस्कुराए मुस्कुरा कर रह गए

ग़ैरत-ए-दुश्मन की ख़ातिर मेरी ग़ैरत लाई रंग
मुझ को महफ़िल में बुलाया और बुला कर रह गए

काम रोने से भी 'साक़ी' अपना कुछ निकला नहीं
लिक्खा क़िस्मत का मिटाया और मिटा कर रह गए