उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ushshaq mein nam ho chuka hai

उश्शाक़ में नाम हो चुका है

عشاق میں نام ہو چکا ہے

शायर: Dattatriya Kaifi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उश्शाक़ में नाम हो चुका है
'कैफ़ी' बदनाम हो चुका है

क्या पूछते हो मरीज़-ए-ग़म को
काम उस का तमाम हो चुका है

आशिक़ का न इम्तिहाँ लो वो तो
बंदा-ए-बे-दाम हो चुका है

क्यूँ हम से न मुँह छुपा के जाएँ
हाँ आप का काम हो चुका है

क्या काम हमें रहा किसी से
जब अपना ही काम हो चुका है

'कैफ़ी' कब तक ये ख़्वाब-ए-ग़फ़लत
मेहर लब-ए-बाम हो चुका है