उर्दू शायरी · ग़ज़ल

use tum se mohabbat hai ghalat-fahmi mein mat rahna

उसे तुम से मोहब्बत है ग़लत-फ़हमी में मत रहना

اسے تم سے محبت ہے غلط فہمی میں مت رہنا

शायर: Aadil Rahi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उसे तुम से मोहब्बत है ग़लत-फ़हमी में मत रहना
ये बस दिल की शरारत है ग़लत-फ़हमी में मत रहना

तुम्ही को देख कर वो मुस्कुराता है तो हैरत क्या
उसे हँसने की 'आदत है ग़लत-फ़हमी में मत रहना

हुए बर्बाद तो अब आह-ओ-ज़ारी कर रहे हो तुम
कहा भी था सियासत है ग़लत-फ़हमी में मत रहना

मैं तुझ को चाहता हूँ बात ये सच है मगर फिर भी
मुझे तेरी ज़रूरत है ग़लत-फ़हमी में मत रहना ही

झुकी नज़रों से तकना और ख़मोशी से गुज़र जाना
मोहब्बत की रिवायत है ग़लत-फ़हमी में मत रहना

किया करता हूँ 'राही' उस की ता'रीफ़ें सबब ये है
वो मुझ से ख़ूबसूरत है ग़लत-फ़हमी में मत रहना