उर्दू शायरी · ग़ज़ल

udasiyon ka hamein aasra shurua se hai

उदासियों का हमें आसरा शुरूअ' से है

اداسیوں کا ہمیں آسرا شروع سے ہے

शायर: Babar Ali Asad8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उदासियों का हमें आसरा शुरूअ' से है
ये आरिज़ा है तो फिर आरिज़ा शुरूअ' से है

वो पूरा सच है तो उस की गवाही आधी क्यूँ
उसे ख़ुदा से यही तो गिला शुरूअ' से है

किसी के रंग के मरहून हैं न लहजे के
कि हम में जो भी है अच्छा बुरा शुरूअ' से है

न तुम ने पूछा कभी और न हम ने बतलाया
वगर्ना घर का यही रास्ता शुरूअ' से है

तुम्हें तो आज ज़माने ने रद किया है मगर
हमारे साथ यही मसअला शुरूअ' से है

ख़ुदा का ज़िक्र हुआ है तो याद आया है
हमारे पास तो अपना ख़ुदा शुरूअ' से है

हमारी आँख में इक ख़्वाब है तुम्हारे लिए
मगर ये शर्त है वो देखना शुरूअ' से है

हम अपने अपने नसीबों की दूरियों पे खड़े
हमारे बीच कोई फ़ासला शुरूअ' से है