उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sanson ki rawani mein KHalal aane laga hai

साँसों की रवानी में ख़लल आने लगा है

سانسوں کی روانی میں خلل آنے لگا ہے

शायर: Babar Ali Asad5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

साँसों की रवानी में ख़लल आने लगा है
ठहरो कि बिछड़ जाने का पल आने लगा है

कहते हो तो लहजे की कमर सीधी न कर लूँ
माना कि मिरे इज्ज़ पे फल आने लगा है

ये क्या कि हर इक वक़्त की बेज़ार समाअ'त
हर लफ़्ज़ की पेशानी पे बल आने लगा है

लाओ मिरी आवाज़ की दस्तार उठा कर
कम-ज़र्फ़ कोई हद से निकल आने लगा है

लो ख़त्म हुइ उम्र-ए-मह-ओ-साल की गिनती
तम्हीद थी जिस की वही कल आने लगा है