उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tu ne hi har qadam pe diya hausla mujhe

तू ने ही हर क़दम पे दिया हौसला मुझे

تو نے ہی ہر قدم پہ دیا حوصلہ مجھے

शायर: Aadil Rahi8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तू ने ही हर क़दम पे दिया हौसला मुझे
यारब नहीं है तेरे सिवा आसरा मुझे

इक बार उस ने कह तो दिया दिलरुबा मुझे
तकता रहा मैं आइने को आइना मुझे

जिन के लिए सनद थी मिरी बात कल तलक
देने लगे हैं आज वही मशवरा मुझे

कॉलेज में इस लिए भी तो जाता रहा कि वो
ऐ काश इक नज़र ही सही देखता मुझे

नाराज़ अपने आप से हूँ मान या न मान
तुझ से शिकायतें हैं न कोई गिला मुझे

हर आन हर ख़ुशी है मिली इस के बावजूद
क्यों लग रही है ज़िंदगी मेरी सज़ा मुझे

हाफ़िज़ मिरा ख़ुदा है सो कहना फ़ुज़ूल है
अपने सिवा किसी का नहीं आसरा मुझे

इस 'ऐन शीन क़ाफ़ में इक पल सुकूँ नहीं
देता है जैसे 'राही' कोई बद-दु'आ मुझे