उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tumhaare shahr mein aangan nahin hai

तुम्हारे शहर में आँगन नहीं है

تمہارے شہر میں آنگن نہیں ہے

शायर: Ghaus Siwani5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुम्हारे शहर में आँगन नहीं है
कहीं तुलसी नहीं चंदन नहीं है

क्लब में मिलते हैं राधा कन्हैया
कि जमुना तट नहीं मधुबन नहीं है

यहाँ हर और आतिश है धुआँ है
कहीं भी आज-कल सावन नहीं है

अमीरी का बदन सोने से पीला
ग़रीबी के लिए उतरन नहीं है

वो देखें किस तरह दिल की सियाही
कि उन के पास अब दर्पन नहीं है