उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tumhaare bin guzara ho raha hai

तुम्हारे बिन गुज़ारा हो रहा है

تمہارے بن گزارا ہو رہا ہے

शायर: Hadeed Fatema5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुम्हारे बिन गुज़ारा हो रहा है
मगर ये दिल तुम्हारा हो रहा है

इधर इस दिल को आदत हो रही है
उधर हम से किनारा हो रहा है

तुझे हर शख़्स प्यारा हो रहा है
ये दिल को कब गवारा हो रहा है

कि रह कर दूर भी तुझ से मिरी जाँ
ख़सारा तो हमारा हो रहा है

मता-ए-जाँ तुम्हारा ख़्वाब था जो
मिरी आँखों का तारा हो रहा है