उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ishq aazar lag raha hai mujhe

इश्क़ आज़ार लग रहा है मुझे

عشق آزار لگ رہا ہے مجھے

शायर: Hadeed Fatema5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इश्क़ आज़ार लग रहा है मुझे
दिल ये बीमार लग रहा है मुझे

चुभ रही अब हैं सारी ख़ुशबूएँ
फूल भी ख़ार लग रहा है मुझे

ग़म में रोया है साथ मेरे सो
आसमाँ यार लग रहा है मुझे

ख़ुद हूँ बेज़ार और हर इक शख़्स
ख़ुद से बेज़ार लग रहा है मुझे

दिल है वीरान और जहाँ सारा
ग़म का बाज़ार लग रहा है मुझे