उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tumhaare baad jo bikhre to ku-ba-ku hue hum

तुम्हारे ब'अद जो बिखरे तो कू-ब-कू हुए हम

تمہارے بعد جو بکھرے تو کو بہ کو ہوئے ہم

शायर: Faheem Shanas Kazmi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुम्हारे ब'अद जो बिखरे तो कू-ब-कू हुए हम
फिर इस के ब'अद कहीं अपने रू-ब-रू हुए हम

तमाम उम्र हवा की तरह गुज़ारी है
अगर हुए भी कहीं तो कभू कभू हुए हम

यूँ गर्द-ए-राह बने इश्क़ में सिमट न सके
फिर आसमान हुए और चार-सू हुए हम

रही हमेशा दरीदा क़बा-ए-जिस्म तमाम
कभी न दस्त-हुनर-मंद से रफ़ू हुए हम

ख़ुद अपने होने का हर इक निशाँ मिटा डाला
'शनास' फिर कहीं मौज़ू-ए-गुफ़्तुगू हुए हम