उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hum ek din nikal aae the KHwab se bahar

हम एक दिन निकल आए थे ख़्वाब से बाहर

ہم ایک دن نکل آئے تھے خواب سے باہر

शायर: Faheem Shanas Kazmi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम एक दिन निकल आए थे ख़्वाब से बाहर
सो हम ने रंज उठाए हिसाब से बाहर

इसी उमीद पे गुज़री है ज़िंदगी सारी
कभी तो हम से मिलोगे हिजाब से बाहर

तुम्हारी याद निकलती नहीं मिरे दिल से
नशा छलकता नहीं है शराब से बाहर

किसी के दिल में उतरना है कार-ए-ला-हासिल
कि सारी धूप तो है आफ़्ताब से बाहर

'शनास' खोल दिए जिस ने हम पे सब असरार
वो एक लफ़्ज़ मिला है किताब से बाहर