उर्दू शायरी · ग़ज़ल

husn alfaz ke paikar mein agar aa sakta

हुस्न अल्फ़ाज़ के पैकर में अगर आ सकता

حسن الفاظ کے پیکر میں اگر آ سکتا

शायर: Faheem Shanas Kazmi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हुस्न अल्फ़ाज़ के पैकर में अगर आ सकता
कैसा होता है ख़ुदा तुम को मैं दिखला सकता

इस सफ़र पे हूँ कि हलकान हुआ जाता हूँ
और कहाँ जाना है ये भी नहीं बतला सकता

हारना भी है यक़ीनी पे मिरी फ़ितरत है
एक ही चाल हमेशा नहीं दोहरा सकता

ज़िंदगी अब तू मुझे और खिलौने ला दे
ऐसे ख़्वाबों से तो मैं दिल नहीं बहला सकता

मैं भी तक़दीर के लिक्खे पे यक़ीं ले आता
वक़्त इक बार जो उस से मुझे मिलवा सकता