उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tum munh laga ke ghairon ko maghrur mat karo

तुम मुँह लगा के ग़ैरों को मग़रूर मत करो

تم منہ لگا کے غیروں کو مغرور مت کرو

शायर: Mah Laqa Chanda5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुम मुँह लगा के ग़ैरों को मग़रूर मत करो
लग चलना ऐसे देसों से दस्तूर मत करो

टस्वे बहा के हर घड़ी ज़ारी नहीं है ख़ूब
ये राज़-ए-इश्क़ है उसे मशहूर मत करो

हर-चंद दिल दुखाना किसी का बुरा है पर
रंजीदा ख़ातिरों को तो रंजूर मत करो

ऐ हमदमो जो मुझ से है मंज़ूर इख़्तिलात
जुज़ ज़िक्र-ए-यार तुम कोई मज़कूर मत करो

रौशन रखो जहान में मौला मिसाल-ए-मेहर
चंदा के मुँह से नूर को तुम दूर मत करो