उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tum dil ki dil mein rakkho bataya nahin karo

तुम दिल की दिल में रक्खो बताया नहीं करो

تم دل کی دل میں رکھو بتایا نہیں کرو

शायर: Sabeela Inam Siddiqui7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुम दिल की दिल में रक्खो बताया नहीं करो
यूँ कह के दास्तान रुलाया नहीं करो

मुझ से बिछड़ के रहता है दिल-शाद एक शख़्स
ये मन-घड़त कहानी सुनाया नहीं करो

आँखों के गिर्द हल्क़े पड़े जाग जाग कर
नींदों को मेरी ऐसे उड़ाया नहीं करो

मेरी ग़ज़ल का तूल तुम्हारे सबब से है
तुम सोच बन के शे'र में आया नहीं करो

तारे शुमार करती हूँ शब भर फ़िराक़ में
तुम दूर मुझ से जाँ मिरी जाया नहीं करो

मज़लूम की सदा से न आ जाए इंक़लाब
इतना ज़ियादा ज़ुल्म भी ढाया नहीं करो

कोशिश करो 'सबीला' के सब तुम से ख़ुश रहें
नाहक़ किसी के दिल को दुखाया नहीं करो