उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tum dhup se na dhup ki yalghaar se bacho

तुम धूप से न धूप की यलग़ार से बचो

تم دھوپ سے نہ دھوپ کی یلغار سے بچو

शायर: Jaleel Haider Lashari4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुम धूप से न धूप की यलग़ार से बचो
दीवार गिरने वाली है दीवार से बचो

रख दे न काट कर कहीं सारे वजूद को
ख़ुद-साख़्ता अनाओं की तलवार से बचो

वो दिल का टूटना तो कोई वाक़िआ न था
अब टूटे दिल की किर्चियों की धार से बचो

ऐसा न हो कि बोझ से सर ही न उठ सके
तुम भीक में मिली हुई दस्तार से बचो