उर्दू शायरी · ग़ज़ल

teri nazar mein tere dil mein ghar kiya jae

तिरी नज़र में तिरे दिल में घर किया जाए

تری نظر میں ترے دل میں گھر کیا جائے

शायर: Tahzeeb Abrar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तिरी नज़र में तिरे दिल में घर किया जाए
अब इस ख़याल ही को दरगुज़र किया जाए

अलावा इश्क़ के है ही नहीं ज़माने में
कोई भी काम जिसे उम्र भर किया जाए

जो वज्ह-ए-शेर थी वो नज़्म हो चुकी कब की
मिरे ख़याल तुझे किस के सर किया जाए

निगाह-ए-ग़ैर से भी देखना कभी ख़ुद को
ये काम सख़्त बहुत है मगर किया जाए

ख़बर मैं कोई भी रखता नहीं हूँ अब उस की
अब इस ख़बर से उसे बा-ख़बर किया जाए