उर्दू शायरी · ग़ज़ल

gham-e-jaanan jahan likkha gaya hai

ग़म-ए-जानाँ जहाँ लिक्खा गया है

غم جاناں جہاں لکھا گیا ہے

शायर: Tahzeeb Abrar7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ग़म-ए-जानाँ जहाँ लिक्खा गया है
वहीं पर राएगाँ लिक्खा गया है

जहाँ आबाद है यादों की बस्ती
उसी को दश्त-ए-जाँ लिक्खा गया है

सितम अपनों के ज़ाहिर हो गए हैं
मिरा दर्द-ए-निहाँ लिक्खा गया है

मैं अपने ही मुक़द्दर में नहीं हूँ
मुझे आख़िर कहाँ लिक्खा गया है

तिरे क़ुर्बान मेरी फ़िक्र-ए-मुसबत
नहीं लिखना था हाँ लिक्खा गया है

वो मेरी ख़ामुशी से डर रहे हैं
जिन्हें अहल-ए-ज़बाँ लिक्खा गया है

सिला ये तुझ में रहने का है शायद
मुझे जो बे-मकाँ लिक्खा गया है