उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tera lahza wahi talwar jaisa tha

तिरा लहज़ा वही तलवार जैसा था

ترا لحظہ وہی تلوار جیسا تھا

शायर: Bakul Dev5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तिरा लहज़ा वही तलवार जैसा था
मिरी गर्दन में ख़म हर बार जैसा था

उतर जाता तो रुस्वाई बहुत होती
कि सर का बोझ भी दस्तार जैसा था

तराशी हैं ग़म-ए-दौराँ ने तक़दीरें
ये ख़ंजर भी किसी औज़ार जैसा था

हँसी भी इश्तिहारों सी चमकती थी
वो चेहरा तो किसी अख़बार जैसा था

बहुत रिश्ते थे सब की क़ीमतें तय थी
हमारे घर में कुछ बाज़ार जैसा था