उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tez hawaen hain gham ki

तेज़ हवाएँ हैं ग़म की

تیز ہوائیں ہیں غم کی

शायर: Rabab Rashidi8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तेज़ हवाएँ हैं ग़म की
ख़ैर मनाओ मौसम की

जब हम ने कुछ ग़ौर किया
दिल में एक किरन चमकी

आज भी है अपनी ही जगह
बात हयात-ए-बरहम की

पाएँ भी तो क्या ता'बीर
हम इक ख़्वाब-ए-मुबहम की

फूल से हँसते चेहरे हैं
रौनक़ बाग़-ए-आलम की

तुम भी वही हो हम भी वही
कोशिश सब ने पैहम की

ज़ौक़-ए-सफ़र है हुस्न-ए-नज़र
कुछ भी कहो पेच-ओ-ख़म की

कैसे हो हस्सास 'रबाब'
अब क्या सूरत है ग़म की