उर्दू शायरी · ग़ज़ल

teri har baat pe tanqid nahin kar sakta

तेरी हर बात पे तन्क़ीद नहीं कर सकता

تیری ہر بات پہ تنقید نہیں کر سکتا

शायर: Aadil Rahi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तेरी हर बात पे तन्क़ीद नहीं कर सकता
हाँ मगर झूट की ताईद नहीं कर सकता

तू अगर जान भी माँगे तो ख़ुशी से दे दूँ
मैं तिरे हुक्म की तरदीद नहीं कर सकता

आख़िरी 'इश्क़ किया मैं ने मगर पहली बार
दूसरी बार ये तफ़रीद नहीं कर सकता

मैं ने देखा है बदलता हुआ लहजा तेरा
इस लिए तुझ से तो उम्मीद नहीं कर सकता

तू ने इस हाल में छोड़ा है कि अल्लाह अल्लाह
'ईद का दिन है मगर 'ईद नहीं कर सकता

ये अलग बात सुख़नवर हूँ मैं 'आदिल-राही'
दर्द इतने हैं कि तस्वीर नहीं कर सकता