उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tere lahje ka teri baat ka aaina hai

तेरे लहजे का तिरी बात का आईना है

تیرے لہجے کا تری بات کا آئینہ ہے

शायर: Qaisar Siddiqi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तेरे लहजे का तिरी बात का आईना है
मेरा हर शे'र तिरी ज़ात का आईना है

तेरी ज़ुल्फ़ों के मचलते हुए सावन का समाँ
मेरे महके हुए जज़्बात का आईना है

मेरे चेहरे को ज़रा ग़ौर से देखो तो सही
मेरा चेहरा मिरे हालात का आईना है

लहलहाती हुई भरपूर जवानी तेरी
गुनगुनाती हुई बरसात का आईना है

ऐ मिरी जान-ए-ग़ज़ल ऐ मिरी शहनाज़-ए-ग़ज़ल
तेरा नग़्मा मिरे जज़्बात का आईना है