उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tere baghair KHud se juda lag raha hun aaj

तेरे बग़ैर ख़ुद से जुदा लग रहा हूँ आज

تیرے بغیر خود سے جدا لگ رہا ہوں آج

शायर: M. Usman Shakir5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तेरे बग़ैर ख़ुद से जुदा लग रहा हूँ आज
बे-लौस चाहतों की सज़ा लग रहा हूँ आज

तुम से बिछड़ के ख़ुद को अजब फ़ैज़ है मिला
मैं अपनी ख़्वाहिशों का ख़ुदा लग रहा हूँ आज

मैं तो तुम्हारे हिज्र में यूँ चूर हो गया
उजड़े हुए चमन की हवा लग रहा हूँ आज

रस्मों की भेंट ऐसे चढ़ा हूँ मैं ऐ क़फ़स
इन बिकती दुल्हनों की रिदा लग रहा हूँ आज

'शाकिर' मैं कैसे अहद निभाऊँगा इस बरस
पूरी न हो सके जो दुआ लग रहा हूँ आज