उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tamam aansu agar shabdon mein Dhal jate to achchha tha

तमाम आँसू अगर शब्दों में ढल जाते तो अच्छा था

تمام آنسو اگر شبدوں میں ڈھل جاتے تو اچھا تھا

शायर: Updesh Vidyarthi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तमाम आँसू अगर शब्दों में ढल जाते तो अच्छा था
तिरी यादों से हम बाहर निकल जाते तो अच्छा था

सर-ए-महफ़िल बता कर यूँ हुए रुस्वा हमीं तो हैं
कि सारे राज़ दिल के हम निगल जाते तो अच्छा था

पुरानी बात को ले कर जो पछताओ तो क्या हासिल
अगर तुम वक़्त रहते ही सँभल जाते तो अच्छा था

ज़माने और थे उन के मोहब्बत और थी उन की
जो मेहमानों से कहते थे कि कल जाते तो अच्छा था

सजी है बज़्म उल्फ़त की अगर 'उपदेश' ऐसे में
सभी बे-मौसमी बादल भी टल जाते तो अच्छा था