उर्दू शायरी · ग़ज़ल

suno ki ishq-o-mohabbat ka tajdar hun main

सुनो कि इश्क़-ओ-मोहब्बत का ताजदार हूँ मैं

سنو کہ عشق و محبت کا تاجدار ہوں میں

शायर: Danish Asari8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सुनो कि इश्क़-ओ-मोहब्बत का ताजदार हूँ मैं
मोहब्बतों के सफ़ीने पे अब सवार हूँ मैं

गुलाब खिलते हैं सीने में मेरे शे'रों के
सो शाख़-ए-गुल की तरह से ही ख़ार-दार हूँ मैं

न ढूँड अब तू मुझे ज़िंदगी की राहों में
तिरी हयात की गुज़री हुई बहार हूँ मैं

ये मेरे शाने पे जो सर है इक अमानत है
सलीब-ए-अरसा-ए-हस्ती पे इक उधार हूँ मैं

ख़ुदा-ए-पाक सफ़ीना उतार दे मेरा
बहुत ज़माना हुआ सिर्फ़ इंतिज़ार हूँ मैं

नहीं है ख़ुद मुझे अपनी ही ज़ात पर कोई हक़
ये किस ने कह दिया है अहल-ए-इख़्तियार हूँ मैं

वरक़ वरक़ पे कई नक़्श थे नुमायाँ से
उन्ही नुक़ूश से उभरा सा इज़्तिरार हूँ मैं

ख़ुशी के नग़्मे सुनाऊँ कहाँ से मैं 'दानिश'
ग़म-ओ-अलम की बहुत लम्बी इक क़तार हूँ मैं