उर्दू शायरी · ग़ज़ल

subh likhna hai sham likhna hai

सुब्ह लिखना है शाम लिखना है

صبح لکھنا ہے شام لکھنا ہے

शायर: Tabrez Ahmed5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सुब्ह लिखना है शाम लिखना है
तेरा ही दिल पे नाम लिखना है

तुम को राधा लिखूँगा ग़ज़लों में
और अब ख़ुद को श्याम लिखना है

कान्हा अब दिल में बस चुके हो तुम
दिल को अब मेरे धाम लिखना है

अब क़लमकार रोज़ बिकते हैं
इन सभी को ग़ुलाम लिखना है

चैन दिल को बग़ैर उस के नहीं
दर्द ख़त में तमाम लिखना है