उर्दू शायरी · ग़ज़ल

shab ki tariki baDhti hi jae

शब की तारीकी बढ़ती ही जाए

شب کی تاریکی بڑھتی ہی جائے

शायर: Ved Rahi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

शब की तारीकी बढ़ती ही जाए
कौन आता है ज़ुल्फ़ बिखराए

झिलमिलाए सितारों के झुरमुट
किस की पलकों पे अश्क थर्राए

उस की जो बात है निराली है
दिल-ए-नादाँ को कौन समझाए

उन को भूले ज़माना होता है
अश्क आँखों में फिर भी भर आए

दम-ब-ख़ुद सारी काएनात हुई
हम ने वो गीत प्यार के गाए