उर्दू शायरी · ग़ज़ल

shab-e-furqat ki tanhai ka lamha

शब-ए-फ़ुर्क़त की तन्हाई का लम्हा

شب فرقت کی تنہائی کا لمحہ (ردیف .. ے)

शायर: Iffat abbas5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

शब-ए-फ़ुर्क़त की तन्हाई का लम्हा
कई राज़-ए-निहानी खोलता है

बहुत दिन से वो ना-मानूस लहजा
मिरे दश्त-ए-अना में गूँजता है

मिरी पहचान रिश्ते मेरा मक़्सद
सदा सरगोशियों में पूछता है

मैं सरगर्दां हूँ उस की जुस्तुजू में
वो कहता है कि मुझ को ढूँडता है

है उस से खुल के मिलना अब ज़रूरी
पस-ए-पर्दा जो मुझ को देखता है