उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHun mein tar sabr ki chadar kahan le jaoge

ख़ून में तर सब्र की चादर कहाँ ले जाओगे

خون میں تر صبر کی چادر کہاں لے جاؤ گے

शायर: Iffat abbas7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़ून में तर सब्र की चादर कहाँ ले जाओगे
ज़िंदगानी को बरहना-सर कहाँ ले जाओगे

आ गए अहकाम-ए-नव्वाब बोलना ममनू' है
तुम सुख़नवर लब-ए-गुस्तर कहाँ ले जाओगे

टूट जाएँगे ज़वाबित चीख़ उट्ठेगा ज़मीर
दूर नज़रों से हर इक मंज़र कहाँ ले जाओगे

तर्क-ए-औला की सज़ा ये पत्थरों का शहर है
अब भला ये काँच का पैकर कहाँ ले जाओगे

शौक़ के पुर-पेच रस्ते और 'अनासिर संग-ए-मील
गर उठा भी लो तो ये पत्थर कहाँ ले जाओगे

आगही का रिज़्क़ कब मलता है और किस सम्त से
कासा-ए-ज़ौक़-ए-नज़र दर दर कहाँ ले जाओगे

हिज्र की शब का है ये पिछ्ला पहर उठ्ठो 'शहाब'
रो चुके शब भर ये चश्म-तर कहाँ ले जाओगे