उर्दू शायरी · ग़ज़ल

shaKHon par jab patte hilne lagte hain

शाख़ों पर जब पत्ते हिलने लगते हैं

شاخوں پر جب پتے ہلنے لگتے ہیں

शायर: Saba Nusrat6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

शाख़ों पर जब पत्ते हिलने लगते हैं
आँसू मेरे दिल पे गिरने लगते हैं

तुझ से दूरी और क़यामत लगती है
आपस में दो वक़्त जो मिलने लगते हैं

दिन तो जैसे-तैसे कट ही जाता है
रात को उठ उठ तारे गिनने लगते हैं

एक तबस्सुम देख के तेरे होंटों पर
फूल ख़िज़ाँ की रुत में खिलने लगते हैं

होता है शानों पे महसूस उस का हाथ
मौसम जब भी रंग बदलने लगते हैं

उस की जब हो जाए 'नुसरत' चश्म-ए-करम
चाक गरेबानों के सिलने लगते हैं