उर्दू शायरी · ग़ज़ल

samundar mein utara ja raha tha

समंदर में उतारा जा रहा था

سمندر میں اتارا جا رہا تھا

शायर: Faisal Khayyam5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

समंदर में उतारा जा रहा था
मुझे धोके से मारा जा रहा था

जहाँ से आज तक गुज़रा नहीं मैं
उसी जानिब दुबारा जा रहा था

नवाज़िश नाम की थी दर-हक़ीक़त
हमें सर से उतारा जा रहा था

बिना तेरे वो इक छोटा सा लम्हा
कहाँ मुझ से गुज़ारा जा रहा था

यही थी सूखे दरिया की कहानी
कहीं तन्हा किनारा जा रहा था