उर्दू शायरी · ग़ज़ल

reza reza main sar-e-rah bikhar jaunga

रेज़ा रेज़ा मैं सर-ए-राह बिखर जाऊँगा

ریزہ ریزہ میں سر راہ بکھر جاؤں گا

शायर: Faisal Farooq5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

रेज़ा रेज़ा मैं सर-ए-राह बिखर जाऊँगा
तुम से गर दूर रहूँगा तो मैं मर जाऊँगा

शाम आएगी तो सोचा है किधर जाऊँगा
बन के ख़ुर्शीद समुंदर में उतर जाऊँगा

वक़्त लगना है मगर काम ये कर जाऊँगा
इक न इक दिन मैं तिरे दिल में उतर जाऊँगा

मुझ को मा'लूम है अंजाम-ए-मोहब्बत ऐ दोस्त
मैं तुझे टूट के चाहूँगा बिखर जाऊँगा

याद रक्खेगी मुझे जिस से ये दुनिया 'फ़ैसल'
राह-ए-उल्फ़त में कोई काम वो कर जाऊँगा