उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dard dil ka ubhar na jae kahin

दर्द दिल का उभर न जाए कहीं

درد دل کا ابھر نہ جائے کہیں

शायर: Faisal Farooq7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दर्द दिल का उभर न जाए कहीं
उस की जानिब नज़र न जाए कहीं

अब तिरे नाम पर धड़कता नहीं
दिल-ए-नादाँ सुधर न जाए कहीं

उन की आग़ोश में है सर मेरा
ये हसीं पल गुज़र न जाए कहीं

चारागर कुछ 'इलाज कर मेरा
याद का ज़ख़्म भर न जाए कहीं

रोज़-ओ-शब दिल में डर सा रहता है
वो मुझे छोड़ कर न जाए कहीं

इक नज़र मुझ पे ऐ मसीहा मिरे
तेरा बीमार मर न जाए कहीं

शीशा-ए-दिल न पत्थरों से मिल
टूट कर तू बिखर न जाए कहीं