उर्दू शायरी · ग़ज़ल

raushni subh ki ya shab ki siyahi denge

रौशनी सुब्ह की या शब की सियाही देंगे

روشنی صبح کی یا شب کی سیاہی دیں گے

शायर: Qaisar Siddiqi8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

रौशनी सुब्ह की या शब की सियाही देंगे
जो भी देना है तुम्हें ज़िल्ल-ए-इलाही देंगे

शैख़ साहब तो अज़ल से ही हैं दुश्मन मेरे
खा के क़ुरआँ की क़सम झूटी गवाही देंगे

उन से रखिए न किसी मेहर-ओ-वफ़ा की उम्मीद
ये तो ऐसे हैं कि सूरज को सियाही देंगे

मौसम-ए-लुत्फ़-ए-अता है अभी मयख़ाने में
जाम क्या चीज़ है ये तुम को सुराही देंगे

तो हिक़ारत की नज़र से न उन्हें देख मियाँ
ये फटे कपड़े तुझे ख़िलअ'त-ए-शाही देंगे

ऐसा लगता है हवाओं के ये पागल झोंके
रेत पर लिक्खी 'इबारत को मिटा ही देंगे

इतनी मायूसी भी अच्छी नहीं खोटे सिक्को
इक न इक दिन तुम्हें हम लोग चला ही देंगे

करके ये फ़ैसला हम घर से चले हैं 'क़ैसर'
कुछ खरी खोटी तुम्हें आज सुना ही देंगे