उर्दू शायरी · ग़ज़ल

phul iKHlas ke honTon pe sajaane wala

फूल इख़्लास के होंटों पे सजाने वाला

پھول اخلاص کے ہونٹوں پہ سجانے والا

शायर: Rafiq Usmani6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

फूल इख़्लास के होंटों पे सजाने वाला
मैं हूँ दुश्मन को भी सीने से लगाने वाला

जा के परदेस मिरे घर का पता भूल गया
अपना बचपन मिरे आँगन में बिताने वाला

उस की यादों को कलेजे से लगाए रखिए
अब न आएगा कभी लौट के जाने वाला

मेरे दुश्मन तुझे मालूम नहीं है शायद
मारने वाले से बढ़ कर है बचाने वाला

कैसे करता मैं शिकायत भी किसी की यारो
मेरा अपना ही था दिल मेरा दुखाने वाला

ऐसे बिछड़ा कि ख़यालों में भी आया न 'रफ़ीक़'
कितना ख़ुद्दार था वो रूठ के जाने वाला