उर्दू शायरी · ग़ज़ल

phir kisi shaKHs ki yaad aai hai

फिर किसी शख़्स की याद आई है

پھر کسی شخص کی یاد آئی ہے

शायर: B S Jain Jauhar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

फिर किसी शख़्स की याद आई है
फिर कोई चोट उभर आई है

फिर वो सावन की घटा छाई है
फिर मिरी जान पे बन आई है

मस्लहत और कहीं लाई है
दिल किसी और का शैदाई है

अब न रोने की क़सम खाई है
आँख भर आए तो रुस्वाई है

एक हंगामा-ए-दीदार के बा'द
फिर वही ग़म वही तन्हाई है