उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ghaTa sawan ki umDi aa rahi hai

घटा सावन की उमडी आ रही है

گھٹا ساون کی امڈی آ رہی ہے

शायर: B S Jain Jauhar4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

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घटा सावन की उमडी आ रही है
पयाम-ए-अश्क भर भर ला रही है

रगों में ख़ून गर्दिश कर रहा है
जवानी साज़-ए-दिल पर गा रही है

रुलाता है उन्हें भी क्या ये सावन
मुझे काली घटा तड़पा रही है

तरन्नुम-ख़ेज़ जमुना के किनारे
किसी की याद पैहम आ रही है