उर्दू शायरी · ग़ज़ल

pahle ghire the be-KHabaron ke hujum mein

पहले घिरे थे बे-ख़बरों के हुजूम में

پہلے گھرے تھے بے خبروں کے ہجوم میں

शायर: Owais Ahmad Dauran7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

पहले घिरे थे बे-ख़बरों के हुजूम में
अब आ गए हैं दीदा-वरों के हुजूम में

कुछ भी नहीं है उड़ती हुई राख के सिवा
क्या ढूँडते हो कम-नज़रों के हुजूम में

शहरों में आइनों के ख़रीदार ही नहीं
इक बे-कली है शीशा-गरों के हुजूम में

पहचान लीजे कौन है इंसाँ का रहनुमा
इन बे-शुमार राहबरों के हुजूम में

पैवंद की तरह नज़र आता है बद-नुमा
पुख़्ता मकान कच्चे घरों के हुजूम में

तेशा-ब-दस्त हर कोई रहता है रात दिन
हम दिल-जलों के बे-जिगरों के हुजूम में

'दौराँ' भी एहतिजाज ही करते हुए मिले
सड़कों पे गश्त करते सरों के हुजूम में