उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nashat usne ajab qurb ki nichhawar ki

नशात उस ने अजब क़ुर्ब की निछावर की

نشاط اس نے عجب قرب کی نچھاور کی

शायर: Yaseen Afzal6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नशात उस ने अजब क़ुर्ब की निछावर की
खड़ी थी बीच में दीवार दिल के अंदर की

मैं किर्चियों की चुभन उम्र भर समेटूंगा
कि दिल ने शीशे पे खाई है चोट पत्थर की

हिनाई शाम दर-ओ-बाम तप से जाते हैं
कहाँ उतारने जाऊँ थकान दिन भर की

खड़ी हुई मिरे चारों तरफ़ हैं दीवारें
निकल के जाए घुटन किस तरफ़ से अंदर की

मैं जुगनुओं के तआ'क़ुब में सुब्ह तक भागा
नज़र में फैली रही तीरगी मुक़द्दर की

हवा के साथ उतरती नहीं नशेबों में
ज़मीं से कितनी है ऊँची सतह समुंदर की