उर्दू शायरी · ग़ज़ल

na jaane kaise mera aaj usne nam liya

न जाने कैसे मिरा आज उस ने नाम लिया

نہ جانے کیسے مرا آج اس نے نام لیا

शायर: Danish Farahi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

न जाने कैसे मिरा आज उस ने नाम लिया
तमाम 'उम्र न जिस ने मिरा सलाम लिया

वो कर के वा'दा ज़माना हुआ नहीं आया
न जाने किस ग़लती का ये इंतिक़ाम लिया

निगाहें मिलते ही उस शोख़ की निगाहों से
हर एक शख़्स ने दिल अपना थाम थाम लिया

जो काम तेग़-ओ-सिनाँ से भी हो नहीं सकता
निगाह-ए-नाज़ से उस शोख़ ने वो काम लिया

शब-ए-फ़िराक़ की बेचैनियों में ऐ 'दानिश'
सुकून-ए-दिल के लिए मैं ने आज जाम लिया