उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mujhe wo chhoD kar jab se gaya hai intiha hai

मुझे वो छोड़ कर जब से गया है इंतिहा है

مجھے وہ چھوڑ کر جب سے گیا ہے انتہا ہے

शायर: Tahir Adeem7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मुझे वो छोड़ कर जब से गया है इंतिहा है
रग-ओ-पय में फ़ज़ा-ए-कर्बला है इंतिहा है

मिरे हालात हैं नाराज़ इस पे क्या करूँ मैं
गुरेज़ाँ आसमानों से दुआ है इंतिहा है

ग़म ओ आलाम हैं या हसरतें हैं ज़िंदगी में
तुम्हारे बाद बाक़ी क्या बचा है इंतिहा है

फ़क़त तुम ही नहीं नाराज़ मुझ से जान-ए-जानाँ
मिरे अंदर का इंसाँ तक ख़फ़ा है इंतिहा है

कहीं मंज़र असालीब-ए-हवस के चार-सू हैं
कहीं पे ख़ून-आलूदा फ़ज़ा है इंतिहा है

ख़मोशी तोड़ दे ऐ ख़ालिक़-ए-अर्ज़-ओ-समा अब
तिरी मख़्लूक़ बन बैठी ख़ुदा है इंतिहा है

ग़ज़ल जो तुम पे 'ताहिर' ने लिखी थी जान-ए-'ताहिर'
वही तो ज़ीनत-ए-बाम-ए-बक़ा है इंतिहा है