उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek pal jita hai to tahir ek pal marta rahta hai

इक पल जीता है तो 'ताहिर' इक पल मरता रहता है

اک پل جیتا ہے تو طاہرؔ اک پل مرتا رہتا ہے

शायर: Tahir Adeem5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इक पल जीता है तो 'ताहिर' इक पल मरता रहता है
मेरा दिल सीने के अंदर मातम करता रहता है

उस की ज़िद और दिल की ख़्वाहिश के माबैन न जाने क्यों
रेज़ा-रेज़ा सोचों का दीवान बिखरता रहता है

बाज़ औक़ात मैं यूँ भी उस को रोने पर उकसाता हूँ
रो कर उस का सुंदर चेहरा और सँवरता रहता है

जान तू मुझ को पहले से भी ज़ियादा अब याद आया कर
तेरे याद आने से मेरा दर्द सँवरता रहता है

जब तक तेरी भीगी पलकें अश्क लुटाती रहती हैं
मेरे सर से अंदेशों का सैल गुज़रता रहता है