उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mohabbat ka meri rangin fasana bhul baiTha hun

मोहब्बत का मिरी रंगीं फ़साना भूल बैठा हूँ

محبت کا مری رنگیں فسانہ بھول بیٹھا ہوں

शायर: Vijay Bahadur Vijay5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मोहब्बत का मिरी रंगीं फ़साना भूल बैठा हूँ
न आओ याद तुम पिछ्ला ज़माना भूल बैठा हूँ

किसी से कुछ नहीं कहता मुझे अपनों ने लूटा है
मिरे ऐ दोस्त मैं हँसना हँसाना भूल बैठा हूँ

मिरे साक़ी मिरी जानिब न हँस कर देखना हरगिज़
तुझे मा'लूम क्या है मुस्कुराना भूल बैठा हूँ

रिहाई पा के ऐ सय्याद जाऊँ तो कहाँ जाऊँ
हुई मुद्दत मुझे मैं आशियाना भूल बैठा हूँ

ज़माने के सितम तो याद आते हैं मुझे लेकिन
'विजय' अपनी वफ़ाओं का तराना भूल बैठा हूँ