उर्दू शायरी · ग़ज़ल

meri nazar ko dar-o-baam par lagaya hua hai

मिरी नज़र को दर-ओ-बाम पर लगाया हुआ है

مری نظر کو در و بام پر لگایا ہوا ہے

शायर: Nadeem ahmad5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिरी नज़र को दर-ओ-बाम पर लगाया हुआ है
चलो किसी ने मुझे काम पर लगाया हुआ है

वो और होंगे जो सहरा में पा-ब-जौलाँ हैं
मुझे तो शहर ने अहकाम पर लगाया हुआ है

अगर वो आया तो इस बार सुब्ह मानूँगा
बहुत दिनों से मुझे शाम पर लगाया हुआ है

कभी तो लगता है ये उज़्र-ए-लंग है वर्ना
मुझे तो कुफ़्र ने इस्लाम पर लगाया हुआ है

वो और लोग हैं जो उस के पास बैठे हैं
हमें तो उस ने किसी काम पर लगाया हुआ है